Wednesday, November 21, 2007

नंदीग्राम में मचा है संग्राम

नंदीग्राम में मचा है संग्राम
नंदीग्राम नंदीग्राम
लाल क्यों है इतना लाल
हर कोई है बेहाल,
चारों तरफ बह रहा खून
लेकिन बुद्धदेव है मौन
जिंदगी मांग रही है मौत से दुअा
सब बोले क्या हुअा क्या हुअा
नंदीग्राम में मचा कोहराम
सब बोले हे राम हे राम
नंदीग्राम में चािहए एक बापू
जो पोछे लोगों के अांसू

2 comments:

satyendra... said...

कविता भी लिखने लग गए। लगता है उसका अंतिम समय आ गया है। अरे भाई अविनाश के ब्लाग से आइडिया... कविता की लाइने तो न चुराइये।

पुनीत ओमर said...

bhupendra ji, ap ne bada achha likha hua hai, par ap tak ajtak nahi pahuch pane ka afsos hai.

apne abhi tak apne blog ki feed nahi available karwai hai. shayad isiliye aisa hai.